Wednesday, 9 July 2025

वो आफ़ताब थे!


'प्यासा' (१९५७) फ़िल्म में गुरुदत्त!
हमारे भारतीय सिनेमा के स्वर्णयुग के महान फ़िल्मकार - अभिनेताओं में से एक गुरुदत्त साहब आज १०० साल के होते!

विश्वसिनेमा की मेरी सबसे पसंदीदा फ़िल्मों में उनकी 'प्यासा' सबसे ऊँचे स्थान पर हैं और उसपर मैं हमेशा बहोत लिखता आ रहा हूँ। उसके अलावा शायराना रूमानीपन पसंद होने के कारन, आज मैं उनकी दूसरी मेरी पसंदीदा फ़िल्म पर ख़ासकर लिख रहां हूँ, जिसे ६५ साल पुरे हुएँ हैं..वो हैं १९६० की 'चौदहवीं का चाँद'!

उससे एक साल पहले उन्होंने बनायी थी 'कागज़ के फूल' (१९५९)..जो गुरुदत्त जी के दिल के क़रीब थी। लेकिन उसे सफ़लता न मिलने पर, उन्होंने अपनी अगली फ़िल्म रोमैंटिक 'मुस्लिम सोशल' करने का सोचा! इसके साथ ही उन्होंने निर्देशन ख़ुद के बजाय मोहम्मद (एम्) सादिक़ जी को सौंपा। और बिरेन नाग़ को उस माहौल के कलानिर्देशन के लिए चुना!

इससे पहले गुरुदत्त जी की क्लासिक फ़िल्में लिखे अबरार अल्वी जी को सिर्फ़ पटकथा लिखनी थी; क्योंकि सग़ीर उस्मानी जी ने लिखी थी इस 'चौदहवीं का चाँद' की कहानी! तहज़ीब, नज़ाकत और नफ़ासत के शहर लखनऊ में फ़ूलनेवाली यह त्रिकोणीय प्रेमकथा थी। इसमें नवाब (रेहमान) और उसके अज़ीज दोस्त अस्लम (गुरुदत्त) का दिल एक ही हसीना जमीला (वहीदा रहमान) पर आता हैं। फ़िर दोस्त के लिए क़ुर्बानी और बीच में प्यार का होता बुरा हाल इसमें बड़ी संवेदनशीलता से दिखाया हैं।

'चौदहवीं का चाँद' (१९६०) फ़िल्म में गुरुदत्त और वहीदा रहमान!
शायराना अंदाज़ से जाती इस फ़िल्म के रूमानी गीत शक़ील बदायुनी जी ने लाजवाब लिखें थें और रवि जी ने उसी लहजे में संगीतबद्ध किएं थें। जो लता मंगेशकर, गीता दत्त, आशा भोसले, शमशाद बेग़म और मोहम्मद रफ़ी जी ने ख़ूब गाएं। इसका फ़िल्मांकन इस बार सिनेमैटोग्राफर नरिमन ईरानी जी ने बड़ी कल्पकता से किया था! इसमें.."ये लखनऊ की सर-ज़मीं.." इस शुरुआती गीत में उन्होंने उस शहर की ख़ासियत को बख़ूबी चित्रित किया हैं। साथ ही उन दोनों के दोस्त बने जॉनी वॉकर पर निक़ाह के समय फ़िल्माया "मेरा यार बना हैं दूल्हा.." और कोठे पर मीनू मुमताज़ ने लाजवाब सादर किया "दिल की कहानी रंग लायी हैं.." मुज़रा.. इनका फ़िल्मांकन भी बहोत कुछ कहता हैं!

इस फ़िल्म में गुरुदत्त और वहीदा रहमान का इश्क़ बड़ी उत्कटता से सामने आता हैं। ख़ासकर रफ़ीजी ने बड़ी रूमानियत से गाए इसके शीर्षक गीत में देखिएं.. "चौदहवीं का चाँद हो.." कहते गुरुदत्त की आँखें प्यार बयां करती हैं और बाद में वहीदा जिस सहजता से उसके गले लगती हैं..यह इज़हार-ए-मोहब्बत स्वाभाविकता से उभर आया था!

यह फ़िल्म बड़ी क़ामयाब रही और इसे पुरस्कार भी मिले। साथ ही '२ रे मॉस्को अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह' में इसे दिखाया गया।

इस तरह का नज़ाकतदार शायराना रूमानीपन मुझे तो बड़ा भाता हैं!

आख़िर में मुझे यह कहना हैं, वहीदा जी को इसमें चाँद कहा गया हैं..तो हमारे लिए..गुरुदत्त आफ़ताब हैं!!

गुरुदत्तजी को सुमनांजलि!!

- मनोज कुलकर्णी

Saturday, 14 June 2025

कौन क्या जाने सफर कहाँ ले जा रहा है उन्हें
ज़िंदगी से ही रुख़सत किए जानेवाला है उन्हें!

- मनोज 'मानस रूमानी'

(विमान दुर्घटना पर शोक!)

Monday, 26 May 2025


अब के हालातों के मद्देनज़र शायर साहिर को याद करनेवाली 'अंजुमन' का परसों पुणे में आयोजन किया गया था! यहाँ 'वल्लरी बुक कैफ़े' में हुई इस महफ़िल में मैंने मेरी शायरी पढ़ी! मेरे अच्छे तार्रुफ़ के लिए 'अंजुमन' के श्री. अंजुम लखनवी जी का शुक्रिया!

- मनोज कुलकर्णी (मानस रूमानी)

Saturday, 24 May 2025

"वो तो कहीं हैं और मगर
दिल के आस पास..
फिरती है कोई शह
निगाह-ए-यार की तरह.."

शायर और गीतकार मजरूह सुलतानपुरी जी की याद आज उनके २५ वे स्मृतिदिन पर आयी!


''तुम जो हुए मेरे हमसफर रस्ते बदल गये.." या "तुमने मुझे देखा होकर मेहरबान.." जैसे रुमानी गीत हो, "हम हैं मता-ए-कुचा ओ बाजार कि तरह.." जैसी नज्म हो.. उनकी शायरी को हमेशा सराहा है!

याद आ रहा है..मजरूह साहब को एक मुशायरे के दौरान मैं मिला था..तब प्यार से उन्होने सर पर हाथ रखा था!
🙏
- मनोज कुलकर्णी
   (मानस रूमानी)

Wednesday, 21 May 2025

वतन के लिए आप की शहादत
हरदम याद करता हैं हिंदुस्तान!

- मनोज 'मानस रूमानी'


हमारे धर्मनिरपेक्ष देश के अज़ीज़ पूर्व प्रधानमंत्री 'भारतरत्न' श्री. राजीव जी गांधी का आज ३४ वा स्मृतिदिन!

इसी समय अब की कठिन घड़ी में याद आती हैं उनकी माताजी, हमारे देश की पूर्व शक्तिशाली एवं प्रभावशाली प्रधानमंत्री 'भारतरत्न' श्रीमती इंदिरा जी गांधी की!

इनको मेरी विनम्र श्रद्धांजलि!!

- मनोज कुलकर्णी

Wednesday, 14 May 2025

 ना हो जंग!

परेशान रहती हैं अवाम यहाँ-वहाँ
ना बिछड़े किसी से कोई यहाँ-वहाँ

ना देखा जाता दुख किसीका यहाँ-वहाँ
ना जाएं किसी की भी जान यहाँ-वहाँ

ना करे कहीं कोई जंग यहाँ-वहाँ
बातचीत से हल निकले यहाँ-वहाँ

इंसानियत की हिफ़ाज़त हो यहाँ-वहाँ
भाईचारा-प्यार स्थापित हो यहाँ-वहाँ

- मनोज 'मानस रूमानी'

Thursday, 8 May 2025


नाज़ है तुझपर मेरे हिन्दुस्तान
जिसकी हैं ये आँखें निगहबान!

- मनोज 'मानस रूमानी'

(हमारी इंडियन आर्मी को ऑपरेशन सिंदूर की बधाई!)