Friday, 8 February 2019

याद शायर निदा फ़ाज़ली और गज़ल गायक जगजीत सिंग की!



'सरफ़रोश' (१९९९) के "होशवालों को खबर क्या.." गाने में सोनाली बेंद्रे!
"होशवालों को खबर क्या 
बेखुदी क्या चीज है..,
इश्क किजे फिर समझिये 
जिन्दगी क्या चीज है.."

..संजोग की बात है कि यह रुमानी गज़ल लिखनेवाले शायर निदा फ़ाज़ली साहब का आज प्रथम स्मृतिदिन हैं..और यह बखुबी गाने वाले यहाँ के 'गज़ल किंग' जगजीत सिंग साहब का आज जनम दिन हैं!
दोनों अब इस जहाँ में नहीं है!!

तरक्कीपसंद शायरी के साथ 'आप तो ऐसे ना थे' (१९८०) से 'इस रात की सुबह नहीं' (१९९६) तक कई फिल्मो के गीत लिखने वाले निदा फ़ाज़ली साहब को 'पद्मश्री' से सम्मानित किया गया था! (मुझे याद है.. 
एक मुशायरे के दौरान उनसे मिलना!)
तरक्कीपसंद शायर निदा फ़ाज़ली जी!

'गज़ल किंग' जगजीत सिंग जी!
गज़ल गायन के साथ जगजीत सिंग साहब ने 'प्रेमगीत' (१९८१) जैसीं फिल्मो के लिए संगीत-आवाज दी इसमें उन्होने गाया "होठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो.." यह रुमानी गीत लाजवाब! 
वह 'पद्मभूषण' से सम्मानित हुए!

इन दोनों को मेरी यह सुमनांजली.!!

- मनोज कुलकर्णी

Thursday, 7 February 2019

श्रेष्ठ कवि-गीतकार प्रदीपजी को प्रणाम!

देशभक्ती के गीत लिखनेवाले कवि प्रदीपजी!

"देख तेरे संसारकी हालत
क्या हो गई भगवान...
कितना बदल गया इन्सान!"

जैसे गीत लिखनेवाले और "ए मेरे वतन के लोगो.." जैसे अपने देशभक्ती के गीतों से आँखे नम करनेवाले कवि प्रदीपजी का १०४ वा जनमदिन अब हुआ!

हमारे भारत के पहले प्रधानमंत्री पं. नेहरू जी के सामने "ए मेरे वतन के लोगो." गाते हुए कवि प्रदीपजी!
वास्तविक नाम रामचंद्र नारायण व्दिवेदी..अध्यापन करते अपनी काव्यप्रतिभा आदर्शवादी कर रहे थे! फिर १९४० में उन्होने 'बंधन' फिल्म के लिए "चल चल रे नौजवान.." यह गीत लिखा..और मशहूर हुए 'बॉम्बे टॉल्किज' की फिल्म 'किस्मत' (१९४३) के इस गाने से..

'किस्मत' (१९४३) के कवि प्रदीप जी ने लिखे "हिंदोस्तान हमारा है..'' गाने का दृश्य!
''आज हिमालय की चोटी से फिर हमने ललकारा है..
दूर हटो...दूर हटो ऐ दुनियावालों हिंदोस्तान हमारा है..''


यह जब भी कानोमें गुंजता है तो दिल देशाभिमान से भर आता है! फिर 'जागृती' (१९५४) का "हम लाए है तुफान से कश्ती निकाल के.." जैसा देश के प्रति जिम्मेदारी का गीत...ऐसी आदर्शवादी गीतों की परंपरा उन्होने फिल्मो को दी!

'जागृती' (१९५४) के प्रदीपजी ने लिखे "आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदोस्तान की." गीत का दृश्य!
१९६१ में 'संगीत नाटक अकादमी' का सम्मान और १९९७ में 'दादासाहब फालके पुरस्कार' से उन्हे सम्मानित किया गया! उनके नाम से 'कवि प्रदीप सम्मान' भी रखा गया!

उनके गीत आज भी समाज प्रबोधन करते है..जैसे की..
"इन्सान का इन्सान से हो भाईचारा..यही पैगाम हमारा..!"


- मनोज कुलकर्णी

वैलेंटाइन्स दिनों में याद आया यह रूमानी गाना...


"मौसम है आशिकाना....
ऐ दिल कहीं से उनको..ऐसे में ढूंढ लाना..
कहना के रुत जवां है..और हम तरस रहे है.."


कमाल अमरोही की फ़िल्म 'पाकीज़ा' (१९७१) में उन्होंने ही लिखे इस गीत को गुलाम मोहम्मद के संगीत में लता मंगेशकर ने गाया और परदेपर मीना कुमारी ने पेश किया था!
यह दुर्लभ तस्वीर जब वह गाना फ़िल्माया जाना था तब की हैं..जहाँ ख़ूबसूरत मीना कुमारी याने महजबीं बानो (जो ख़ुद अच्छी शायरा थी)..अपनी कलम से कुछ लिख रही हैं!

 लाजवाब!!

- मनोज कुलकर्णी

Sunday, 3 February 2019

गुरुदत्तजी की फिल्म 'चौदवी का चाँद' (१९६०) में उनके सामने वहिदा रहमान!
"चौदहवीं का चाँद हो...या आफताब हो...
जो भी हो तुम खुदा की कसम लाजवाब हो!"


भारतीय सिनेमा की बुजुर्ग तथा बेहतरीन अदाकारां वहिदा रहमानजी को ८१ वी सालगिरह मुबारक!

याद आ रहा है कुछ साल पूर्व फिल्म समारोह के दौरान उनसे मिलकर हुई बातचीत!

- मनोज कुलकर्णी

Wednesday, 30 January 2019

'झाँसी की रानी'..मेहताब और कंगना!


'मणिकर्णिका - द क्वीन ऑफ़ झाँसी' का पोस्टर!
'झाँसी की रानी' (१९५३) का पोस्टर!
अब बॉलीवुड 'क्वीन' कंगना रनौत की नयी फ़िल्म.. 'मणिकर्णिका - द क्वीन ऑफ़ झाँसी' प्रदर्शित होकर सफलता हासिल कर रही हैं। इस अवसर पर ६६ साल पहले जनवरी में ही प्रदर्शित क्लासिक फ़िल्म 'झाँसी की रानी' की याद आती हैं..जिसमें मेहताब जी ने यह भूमिका बेहतरिन साकार की!


'झाँसी की रानी' (१९५३) में मेहताब!
'मिनर्वा मूवीटोन' के सिंह कहलाने वाले सोहराब मोदी ने १९५३ में 'झाँसी की रानी' फ़िल्म का निर्माण किया था.और शिर्षक भूमिका में (अपनी पत्नि) मेहताब के साथ..खुद उसमें राजगुरु की भूमिका निभायी थी। ब्रिटिशों के ख़िलाफ़ १८५७ में हुए पहले स्वतंत्रता संग्राम में बड़ा योगदान देनेवाली थी रानी लक्ष्मीबाई! उसपर १९४६ में वृंदावन लाल वर्मा ने लिखे उपन्यास पर यह फ़िल्म पंडित एस. आर. दुबे ने लिखी थी! 
'झाँसी की रानी' (१९५३) में सोहराब मोदी और मेहताब!

पहले ब्लैक एंड वाइट में हुई और बाद में टेक्नीकलर में परिवर्तित भव्यता से बनी फिल्म 'झाँसी की रानी' (१९५३) की विशेषता यह भी थी की हॉलीवुड के तकनीकी जानकर इसमें सहभागी हुएं थें! इसमें प्रमुख थे प्रसिद्ध 'गॉन विथ द विंड' (१९३९) के 'ऑस्कर' प्राप्त सिनेमाटोग्राफर अर्नेस्ट हालेर.. जिनको यहाँ एम्. मल्होत्रा और वाय. डी सरपोतदार ने सहायता की थी। तथा इसका एडिटिंग किया था अंग्रेजी रुसेल लॉयड ने! फिर यह फ़िल्म १९५६ में 'टाइगर एन्ड द फ्लेम' नाम से अंग्रेजी में बाहर भी प्रदर्शित हुई!

'मणिकर्णिका-द क्वीन ऑफ़ झाँसी' के दृश्यों में जोशपूर्ण कंगना रनौत!
अब आयी 'ज़ी स्टूडियोज' निर्मित.. 'मणिकर्णिका - द क्वीन ऑफ़ झाँसी' यह फ़िल्म (क्रिश से लेकर) कंगना रनौत ने ही निर्देशित की हैं! इससे पहले अपनी हिट फ़िल्म 'क्वीन' (२०१४) लिखने से उसका एक कदम इस ओर पड़ा ही था। हालांकि 'मणिकर्णिका' को साऊथ के ('बाहुबली'/२०१५ फेम) के. व्ही. विजयेंद्रप्रसाद जी ने लिखा हैं। इसमें शिर्षक भूमिका कंगना ने बख़ूबी साकार की हैं!

"मेरी झाँसी नहीं दूँगी.s s.." यह गूँज दोनों फिल्मों में! लेकिन १९५३ की 'झाँसी की रानी' में परिपक्व दिखती मेहताब ने यह सुनाई; तो अब 'मणिकर्णिका' में अपने जोशीले अंदाज में कंगना ने!



आजादी के ७० साल पुरे किएँ अपने भारत में स्त्री शक्ति ऐसी ही अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठातीं रहें!!

- मनोज कुलकर्णी
   ('चित्रसृष्टी')

Saturday, 26 January 2019

"भारत का रहने वाला हूँ..भारत की बात सुनाता हूँ.."


हमारे मशहूर राष्ट्रभक्त अभिनेता-फिल्मकार मनोज कुमार साहब के साथ उनके बंबई स्थित निवास पर!


प्रजासत्ताक दिन मुबारक!!

- मनोज कुलकर्णी

Wednesday, 23 January 2019

स्वागत और बधाई!!


कांग्रेस की महासचिव पद पर प्रियंका गांधी वाड्रा के ऐलान की ख़बर से बहोत ख़ुशी हुई!



इस जरिये उनका राजनीति में अधिकारिक तौर पर सक्रीय प्रवेश हुआ हैं!

उनमें उनकी दादी और हमारे भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी की प्रतिमा दिखाई देती हैं!

उनको मुबारक़बाद और शुभकामनाएं!!


- मनोज कुलकर्णी