Wednesday, 19 November 2025

उलझन में रहे जीवन की अखेर!


गायिका-अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित.

"अपने जीवन की उलझन को कैसे मैं सुलझाऊं.."

ऐसी अपनी फ़िल्म के गीत की तरह ज़िंदगी में उलझी रही खूबसूरत गायिका-अभिनेत्री सुलक्षणा पंडित जी आखिर में यह जहाँ छोड़ गयी!


संगीत के घराने से आई सुलक्षणा जी का फ़िल्मी सफ़र बतौर गायिका ही शुरू हुआ। 'दूर का राही' (१९७१) फ़िल्म में "बेकरार दिल तू गाए जा.." यह डूएट उसने किशोर कुमार जैसे मंजे हुए गायक के साथ गाया। तब महज़ १७ साल की उम्र में उनकी गायकी में कोमलता के साथ भावुकता भी थी! बाद में "घडी मिलन की आई.." और "जब आती होगी याद मेरी.." जैसे मीठे गीत उन्होंने ग्रेट मोहम्मद रफ़ी जी के साथ गाए! 'संकल्प' (१९७५) फ़िल्म के "तू ही सागर हैं तू ही किनारा.." गाने के लिए उन्हें 'फिल्मफेयर' अवार्ड और 'तानसेन' पुरस्कार मिला!
'उलझन' (१९७५) फ़िल्म में संजीव कुमार और सुलक्षणा पंडित!
१९७५ में रघुनाथ झालानी की फ़िल्म 'उलझन' से बतौर अभिनेत्री सुलक्षणा जी पर्दे पर आई। इसमें उनके नायक थे संजीव कुमार और इस मंजे हुए अभिनेता के साथ इस सस्पेंस थ्रिलर में उनका अभिनय भी कमाल का रहा। बाद में जितेंद्र के साथ अनिल गांगुली की 'संकोच' (१९७६) इस 'परिणीता' उपन्यास पर आधारित फ़िल्म में उन्होंने प्रमुख नायिका लोलिता की भूमिका निभाई। 'बंदी' (१९७८) इस बंगाली फ़िल्म में तो वो राजकुमारी बनी और साथ में थे वहां के महानायक उत्तमकुमार!


फिर राजेश खन्ना, फ़िरोज़ ख़ान, विनोद खन्ना, शशी कपूर, शत्रुघ्न सिन्हा, ऋषि कपूर और जितेंद्र के साथ सुलक्षणा जी ने कई फ़िल्मों में काम किया। पर उनके दिल के करीब संजीव कुमार रहे! लेकिन उनकी मोहब्बत अधूरी रह गई!

 
यह कैसा संजोग, संजीव कुमार जी का निधन १९८५ में ६ नवंबर को हुआ था और अब ४० साल बाद ६ नवंबर को ही सुलक्षणा जी इस जहाँ से रुख़सत हुई!!

उन्हें सुमनांजलि!!

- मनोज कुलकर्णी

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